डेनमार्क मिंक कलन COVID मुआवज़ा: सितंबर 2026 अंतिम समझौता
डेनमार्क में मिंक कलन COVID मुआवज़ा अंतिम समझौते की घोषणा ने पशु अधिकारों और जलवायु नीति पर नई बहस छेड़ दी है।
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19 अरब डेनिश क्रोनर
19 अरब
कुल मुआवज़ा राशि, डेनिश सरकार 2026 के अनुसार
17 मिलियन
17 मिलियन
2020 में मारे गए मिंकों की संख्या, WHO के अनुसार
275 फर खेती
275
2020 में बंद होने वाली फार्मों की संख्या, डेनिश कृषि एजेंसी
0 फर खेती
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2026 तक डेनमार्क में सक्रिय फर खेती, सरकारी आंकड़े
TL;DR: डेनमार्क ने सितंबर 2026 में 2020 के मिंक कलन के लिए अंतिम COVID मुआवज़ा समझौते की घोषणा की, जिसमें किसानों को 19 अरब डेनिश क्रोनर दिए जाएँगे। यह समझौता फर उद्योग के बंद होने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पशु कल्याण और जलवायु कार्रवाई के लिए एक मिसाल पेश करता है। भारत के लिए इससे सबक लेने की ज़रूरत है, क्योंकि वहाँ पशु-आधारित कृषि से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की चुनौती है।
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“यह समझौता न केवल मुआवज़ा है, बल्कि पशु शोषण के अंत का आरंभ है।”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- डेनमार्क मिंक कलन COVID मुआवज़ा समझौता क्या है?
- डेनमार्क सरकार ने 2020 में COVID-19 महामारी के दौरान सभी मिंकों को मारने के बाद, किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए 19 अरब डेनिश क्रोनर का अंतिम मुआवज़ा समझौता किया है। यह समझौता सितंबर 2026 में अंतिम रूप से तय हुआ, जिसमें किसानों को उनके व्यवसाय के नुकसान के लिए मुआवज़ा दिया जाएगा।
- डेनमार्क ने मिंकों को क्यों मारा?
- नवंबर 2020 में, डेनमार्क में मिंकों में COVID-19 का एक उत्परिवर्तित रूप पाया गया, जो मनुष्यों में फैल सकता था और वैक्सीन की प्रभावशीलता को कम कर सकता था। इसलिए, सरकार ने महामारी को फैलने से रोकने के लिए सभी लगभग 17 मिलियन मिंकों को मारने का आदेश दिया। यह निर्णय स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक था, लेकिन इससे पशु कल्याण और किसानों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
- इस समझौते का पशु कल्याण पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- यह समझौता फर उद्योग को स्थायी रूप से बंद करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डेनमार्क सरकार ने फर खेती पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे भविष्य में इस तरह के पशु शोषण की संभावना कम हो जाएगी। यह पशु अधिकारों की दृष्टि से एक सकारात्मक बदलाव है, क्योंकि मिंकों को उनके प्राकृतिक आवास से अलग करना और उन्हें मारना नैतिक रूप से गलत माना गया।
- डेनमार्क मिंक कलन मुआवज़े से जलवायु पर क्या असर पड़ेगा?
- पशु-आधारित कृषि, विशेष रूप से फर खेती, पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। मिंक खेती के लिए भारी मात्रा में पानी, चारा और ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन होता है। इस समझौते से फर उद्योग बंद होने से डेनमार्क के कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जो जलवायु कार्रवाई की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
- भारत के लिए इस समझौते से क्या सबक लिया जा सकता है?
- भारत में पशु-आधारित कृषि, जैसे डेयरी और मांस उद्योग, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का प्रमुख स्रोत है। डेनमार्क का यह कदम दिखाता है कि पशु-आधारित उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से बंद करके या उन्हें नियंत्रित करके स्वास्थ्य और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। भारत को चाहिए कि वह पशु कल्याण और जलवायु लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियाँ बनाए।
- क्या यह समझौता अंतिम है?
- हाँ, यह समझौता अंतिम है। डेनमार्क की सरकार और किसान संगठनों के बीच लंबी बातचीत के बाद सितंबर 2026 में इस पर हस्ताक्षर किए गए। अब किसानों को मुआवज़ा राशि वितरित की जाएगी, और फर उद्योग को स्थायी रूप से बंद करने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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