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मिथक: सोया पुरुषों में हार्मोनल समस्याएं पैदा करता है

वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, सोया का सामान्य सेवन पुरुषों में हार्मोनल समस्याएं नहीं पैदा करता। यह मिथक अतिरंजित है और इसका कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है।

अपडेट किया गया · 28 अगस्त 2026

त्वरित उत्तर

यह दावा ज्यादातर गलत है। सोया में मौजूद फाइटोएस्ट्रोजन (आइसोफ्लेवोन्स) इंसानी एस्ट्रोजन की तुलना में बहुत कमजोर होते हैं और सामान्य मात्रा में सेवन से पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन या शुक्राणु पर कोई असर नहीं पड़ता। कई अध्ययन इसकी सुरक्षा की पुष्टि करते हैं।

मुख्य बातें

  • सोया में मौजूद आइसोफ्लेवोन्स इंसानी एस्ट्रोजन की तुलना में 100-1000 गुना कमजोर होते हैं।
  • 25-100 मिलीग्राम आइसोफ्लेवोन्स का दैनिक सेवन पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन स्तर को प्रभावित नहीं करता।
  • मेटा-विश्लेषणों में सोया और शुक्राणु गुणवत्ता में कोई नकारात्मक संबंध नहीं पाया गया है।
  • सोया का नियमित सेवन प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को कम करने से जुड़ा है।
  • सोया प्रोटीन और आइसोफ्लेवोन्स को यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (EFSA) द्वारा सुरक्षित माना गया है।
100-1000 गुना कमजोर
आइसोफ्लेवोन्स की शक्ति
सोया फाइटोएस्ट्रोजन इंसानी एस्ट्रोजन की तुलना में बहुत कमजोर होते हैं, इसलिए हार्मोनल प्रभाव नगण्य है।
कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं
टेस्टोस्टेरोन पर प्रभाव
41 अध्ययनों के मेटा-विश्लेषण में सोया प्रोटीन से टेस्टोस्टेरोन में कोई कमी नहीं पाई गई।
25-100 मिलीग्राम
दैनिक सुरक्षित सेवन
यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (EFSA) के अनुसार, आइसोफ्लेवोन्स की यह मात्रा वयस्क पुरुषों के लिए सुरक्षित है।
कम होता है
प्रोस्टेट कैंसर जोखिम
सोया का सेवन प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को कम करने से जुड़ा है, जो इसके सुरक्षात्मक गुणों को दर्शाता है।

सोया पुरुषों में हार्मोनल समस्याएं पैदा करता है — यह दावा आपने शायद कई जगह सुना होगा। यह मिथक अक्सर शाकाहारी या पौध-आधारित आहार पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, खासकर पुरुषों के स्वास्थ्य के संदर्भ में।

दावा

इस दावे के अनुसार, सोया में मौजूद फाइटोएस्ट्रोजन (आइसोफ्लेवोन्स) पुरुष हार्मोन को बाधित कर सकते हैं, जिससे टेस्टोस्टेरोन घट सकता है, शुक्राणु संख्या प्रभावित हो सकती है, या स्त्री-लक्षण विकसित हो सकते हैं (जिन्हें बोलचाल में 'गाइनेकोमास्टिया' कहा जाता है)। इस विचार को अक्सर सोशल मीडिया और कुछ फिटनेस समुदायों में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, जिससे कई पुरुष सोया उत्पादों से परहेज करने लगते हैं।

यह दावा कहां से आया

इस मिथक की जड़ें उन प्रयोगशाला अध्ययनों में हैं जिनमें चूहों को अत्यधिक उच्च मात्रा में आइसोफ्लेवोन्स दिए गए थे। इन अध्ययनों में देखा गया कि बड़ी खुराक से जानवरों में हार्मोनल बदलाव हुए। हालांकि, इन खुराकों को इंसानों के सामान्य सोया सेवन से जोड़ना गलत है। इसके अलावा, कुछ पुरानी रिपोर्टों में एक या दो व्यक्तियों के मामले सामने आए थे, जिनमें अत्यधिक सोया सेवन के कारण हार्मोनल परिवर्तन देखे गए, लेकिन ये मामले बेहद दुर्लभ और अनियमित थे। इस तरह की घटनाओं को मीडिया में सनसनीखेज बनाकर पेश किया गया, जिससे यह मिथक फैल गया।

सबूत क्या कहते हैं

वैज्ञानिक साक्ष्य इस दावे का समर्थन नहीं करते। एक महत्वपूर्ण मेटा-विश्लेषण (Reed et al., 2020) में 41 अध्ययनों की समीक्षा की गई और पाया गया कि सोया उत्पादों या आइसोफ्लेवोन्स की खुराक लेने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा। यह विश्लेषण कई यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों पर आधारित था, जिनमें 25-70 ग्राम सोया प्रोटीन प्रतिदिन दिया गया था — यह मात्रा एक सामान्य व्यक्ति के दैनिक सेवन से कहीं अधिक है।

इसी तरह, शुक्राणु गुणवत्ता पर सोया के प्रभाव की जांच करने वाले अध्ययनों में कोई नकारात्मक संबंध नहीं पाया गया। एक अन्य मेटा-विश्लेषण में पाया गया कि सोया का सेवन प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को कम करने से जुड़ा है — यह सोया फाइटोएस्ट्रोजन के सुरक्षात्मक प्रभाव का संकेत है। यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (EFSA) ने 2015 में अपनी वैज्ञानिक राय में कहा कि सोया आइसोफ्लेवोन्स पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित हैं, बशर्ते अनुशंसित मात्रा से अधिक न लिया जाए।

वास्तविकता यह है कि इंसानी शरीर सोया आइसोफ्लेवोन्स को अपने एस्ट्रोजन से अलग तरीके से संसाधित करता है। फाइटोएस्ट्रोजन इंसानी एस्ट्रोजन के रिसेप्टर्स से कमजोर रूप से जुड़ते हैं और उनका प्रभाव बहुत मामूली होता है। इसलिए, गलतफहमी के विपरीत, सोया 'मर्दानगी' को खतरे में नहीं डालता।

सच्चाई का अंश

इस मिथक में एक छोटी सी सच्चाई यह है कि सोया में आइसोफ्लेवोन्स होते हैं, जो तकनीकी रूप से फाइटोएस्ट्रोजन हैं। कुछ अध्ययनों में, अत्यधिक उच्च मात्रा में आइसोफ्लेवोन्स की खुराक (जैसे 150 मिलीग्राम/दिन से अधिक, जो एक सामान्य जापानी आहार से 10-20 गुना अधिक है) लेने से कुछ व्यक्तियों में हार्मोनल गड़बड़ी देखी गई है। लेकिन ये मामले सामान्य आहार सेवन पर लागू नहीं होते। दूसरे शब्दों में, यदि आप सोया दूध पीते हैं या टोफू खाते हैं, तो आपको हार्मोनल समस्याओं की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

ईमानदार निष्कर्ष

वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर, सोया पुरुषों के लिए सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक है। यह मिथक डर और गलत सूचना पर आधारित है, न कि ठोस विज्ञान पर। यदि आप पौध-आधारित आहार अपना रहे हैं या सोया को अपने भोजन में शामिल करना चाहते हैं, तो यह पुरुष हार्मोन के लिए चिंता का विषय नहीं है। सोया प्रोटीन का सेवन हृदय स्वास्थ्य, प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम और कई अन्य लाभों से जुड़ा है। अंततः, यह दावा मिथक है, और आप बिना किसी हिचकिचाहट के सोया का सेवन कर सकते हैं।

आम सवाल

लोग यह भी पूछते हैं

नहीं। कई अध्ययनों और मेटा-विश्लेषणों में पाया गया है कि सोया या आइसोफ्लेवोन्स की खुराक लेने से पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन के स्तर पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ता। सामान्य आहार में सोया का सेवन सुरक्षित है और टेस्टोस्टेरोन को प्रभावित नहीं करता।

दयालु ब्रीफिंग

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