पशु परीक्षण: एक तथ्यपरक अवलोकन
पशु परीक्षण प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान, दवा परीक्षण और उत्पाद सुरक्षा के लिए जानवरों का उपयोग है। यह नैतिक प्रश्न उठाता है, लेकिन वैज्ञानिक विकल्पों में बदलाव तेज़ी से हो रहा है।
अपडेट किया गया · 18 अगस्त 2026
त्वरित उत्तर
पशु परीक्षण वह प्रक्रिया है जिसमें चूहों, खरगोशों, बंदरों और अन्य जानवरों पर दवाओं, रसायनों या उत्पादों का परीक्षण किया जाता है। यह अभी भी दुनिया भर में प्रचलित है, लेकिन इसकी वैज्ञानिक सीमाएँ और नैतिक समस्याएँ स्पष्ट हैं, और विकल्प तेज़ी से विकसित हो रहे हैं।
मुख्य बातें
- विश्व में प्रति वर्ष लगभग 115 मिलियन जानवरों का उपयोग अनुसंधान और परीक्षण में होता है (वैज्ञानिक अनुमान)।
- केवल 5-10% पशु परीक्षण परिणाम मानव रोगों पर सीधे लागू होते हैं, जिससे इसकी वैज्ञानिक विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
- यूरोपीय संघ में 2013 से सौंदर्य प्रसाधनों और उनके अवयवों पर पशु परीक्षण प्रतिबंधित है।
- भारत में 2014 से सौंदर्य प्रसाधनों के लिए पशु परीक्षण प्रतिबंधित है, और 2022 में इस प्रतिबंध को मजबूत किया गया।
- ऑर्गन-ऑन-चिप, मानव-कोशिका-आधारित मॉडल और इन सिलिको परीक्षण जैसे विकल्प तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
पशु परीक्षण का विषय विज्ञान, नैतिकता और कानून के संगम पर स्थित है। यह लेख बताता है कि पशु परीक्षण क्या है, इसका दायरा कितना विशाल है, और क्यों दुनिया भर के वैज्ञानिक तेज़ी से इसके विकल्प अपना रहे हैं।
What it is
पशु परीक्षण, जिसे पशु अनुसंधान या विवो परीक्षण भी कहा जाता है, में जीवित जानवरों पर दवाओं, रसायनों, सौंदर्य प्रसाधनों और चिकित्सा उपकरणों के प्रभावों का अध्ययन किया जाता है। इसमें चूहे, चुहे, खरगोश, गिनी पिग, कुत्ते, बिल्ली और प्राइमेट शामिल होते हैं। परीक्षण में त्वचा पर पदार्थ लगाना, ऊतक निकालना, या जानवरों को मजबूरन दवाएँ खिलाना शामिल हो सकता है।
वैज्ञानिक इसका उपयोग मानव रोगों को समझने, दवाओं की सुरक्षा जाँचने और उत्पादों के जहरीले प्रभावों का पता लगाने के लिए करते हैं। परंपरागत रूप से इसे सुरक्षा का मानक माना गया है, लेकिन अब इसका विरोध बढ़ रहा है।
Why it matters
पशु परीक्षण से दो बड़ी समस्याएँ जुड़ी हैं: नैतिक और वैज्ञानिक। नैतिक दृष्टि से, यह संवेदनशील प्राणियों को पीड़ा और मृत्यु के प्रति उजागर करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से, पशु और मानव शरीर में महत्वपूर्ण अंतर हैं; कई दवाएँ जो जानवरों पर सुरक्षित रहीं, इंसानों पर असर नहीं करतीं या हानिकारक साबित हुईं।
इसके अलावा, पशु परीक्षण में लगने वाला समय और खर्च भी बड़ी चुनौती है। इसलिए, कई देशों में कानून बदल रहे हैं, और वैज्ञानिक समुदाय विकल्पों की ओर बढ़ रहा है।
The numbers
वैश्विक स्तर पर, अनुसंधान और परीक्षण में उपयोग होने वाले जानवरों की संख्या का अनुमान प्रति वर्ष 115 मिलियन के आसपास है। हालाँकि, यह संख्या विभिन्न देशों की रिपोर्टिंग की कमी के कारण पूरी तरह सटीक नहीं है।
- यूरोपीय संघ में 2020 में लगभग 7.9 मिलियन जानवरों का उपयोग हुआ (यूरोपीय आयोग के आँकड़े)।
- भारत में, 2019-2022 के बीच प्रति वर्ष लगभग 3.5 से 4.5 लाख जानवरों का उपयोग अनुसंधान के लिए हुआ (भारत सरकार की रिपोर्ट)।
- अध्ययनों से पता चलता है कि पशु परीक्षण के बावजूद, नई दवाओं के विफल होने की दर 95% तक है।
| परीक्षण का प्रकार | उदाहरण | उपयोग (%)* |
|---|---|---|
| दवा सुरक्षा | जहरीली खुराक परीक्षण | 45% |
| बुनियादी अनुसंधान | रोग समझना | 30% |
| उत्पाद परीक्षण | सौंदर्य प्रसाधन, घरेलू उत्पाद | 15% |
| शिक्षा और अन्य | प्रशिक्षण | 10% |
*अनुमानित, डेटा स्रोत: विभिन्न देशों की रिपोर्टों का मिलान।
What's changing
पिछले दशक में, पशु परीक्षण में बड़ा बदलाव आया है। यूरोपीय संघ, भारत, इज़राइल और कई अन्य देशों ने सौंदर्य प्रसाधनों पर पशु परीक्षण प्रतिबंधित कर दिया है। 2022 में, भारत के CPCSEA ने दिशानिर्देशों को और सख्त किया।
वैज्ञानिक विकल्पों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है: ऑर्गन-ऑन-चिप (मानव अंगों की नकल करने वाली चिपें), 3डी कोशिका संवर्धन, मानव-कोशिका-आधारित परीक्षण और कंप्यूटर मॉडलिंग। ये विकल्प अधिक सटीक और लागत प्रभावी साबित हो रहे हैं।
अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने हाल के वर्षों में कुछ दवाओं के परीक्षण में पशु-मुक्त मॉडल को स्वीकार करना शुरू किया है। यह एक बड़ा संकेत है कि वैज्ञानिक संस्थान बदलाव को स्वीकार कर रहे हैं।
What you can do
- उन ब्रांडों को चुनें जो क्रुएल्टी-फ्री प्रमाणित हैं। भारत में 'ब्यूटी विदाउट बनी' जैसे प्रमाणन देखें।
- पशु परीक्षण के मुद्दे पर जागरूकता फैलाएँ, सोशल मीडिया पर और अपने सर्कल में।
- ऐसे उत्पाद खरीदते समय लेबल पढ़ें; 'पशु परीक्षण नहीं' या 'क्रुएल्टी-फ्री' लिखा होता है।
- स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर कानूनी बदलावों के लिए संगठनों का समर्थन करें, जैसे PETA इंडिया या ह्यूमेन सोसाइटी इंडिया।
आम सवाल