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नैतिक भोजन

क्विनोआ बनाम कुट्टू: भारतीय आहार के लिए 7 प्रोटीन मिथक

क्विनोआ और कुट्टू की प्रोटीन मात्रा और स्थिरता की तुलना, भारतीय आहार के लिए सच्चाई जानें।

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क्विनोआ बनाम कुट्टू: भारतीय आहार के लिए 7 प्रोटीन मिथक

TL;DR: क्विनोआ और कुट्टू दोनों पूर्ण प्रोटीन स्रोत हैं, लेकिन भारतीय किसानों और उपभोक्ताओं के लिए कुट्टू अधिक टिकाऊ, सस्ता और स्थानीय रूप से उपलब्ध विकल्प है। क्विनोआ में प्रोटीन थोड़ा अधिक होता है, लेकिन कुट्टू की खेती से पानी की बचत होती है और यह भारतीय जलवायु में आसानी से उगता है। यह लेख 7 आम मिथकों को तोड़ता है और आपके नैतिक भोजन विकल्पों को स्पष्ट करता है।


भारत में स्वास्थ्य और स्थिरता के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, और इसी के साथ 'क्विनोआ बनाम कुट्टू' की बहस भी तेज़ हो गई है। सितंबर 2026 में, जब जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा पर वैश्विक चिंताएँ अपने चरम पर हैं, भारतीय उपभोक्ता अपनी थाली में प्रोटीन के स्रोतों पर फिर से विचार कर रहे हैं।

क्विनोआ (Chenopodium quinoa) एक छद्म-अनाज है जो दक्षिण अमेरिका के एंडीज़ क्षेत्र का मूल निवासी है। कुट्टू (Fagopyrum esculentum) एक छद्म-अनाज है जो भारत में सदियों से उगाया जाता रहा है, विशेषकर व्रत और उपवास के दौरान। दोनों ही ग्लूटेन-मुक्त हैं, लेकिन इनके पोषण, पर्यावरणीय प्रभाव और भारतीय संदर्भ में उपयोगिता में बड़ा अंतर है। आइए, 7 प्रचलित मिथकों को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर तोड़ें।


मिथक 1: क्विनोआ में प्रोटीन की मात्रा कुट्टू से कहीं अधिक होती है

सीधा उत्तर: यह पूरी तरह सच नहीं है। क्विनोआ में प्रोटीन की मात्रा प्रति 100 ग्राम में लगभग 14.1 ग्राम होती है, जबकि कुट्टू में लगभग 13.2 ग्राम होती है (USDA, 2021)। यह अंतर नगण्य है, और दोनों ही उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन प्रदान करते हैं।

हालाँकि, प्रोटीन की मात्रा से अधिक महत्वपूर्ण है इसकी गुणवत्ता। दोनों में सभी 9 आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं, जो उन्हें 'पूर्ण प्रोटीन' बनाते हैं। कुट्टू में लाइसिन की मात्रा अधिक होती है, जो आमतौर पर अनाज में कम पाई जाती है।

Key stat: USDA के अनुसार, 100 ग्राम पके हुए क्विनोआ में 4.4 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि पके हुए कुट्टू में 3.4 ग्राम (USDA, 2021)। सूखे अनाज की तुलना में यह अंतर और भी कम हो जाता है।

भारतीय आहार में, जहाँ दालें और अन्य फलियाँ प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं, क्विनोआ और कुट्टू दोनों ही उत्कृष्ट पूरक हैं। अंतर इतना कम है कि यह आपके दैनिक प्रोटीन सेवन के लिए निर्णायक नहीं होना चाहिए।


मिथक 2: कुट्टू केवल व्रत के लिए है, रोज़ के भोजन के लिए नहीं

सीधा उत्तर: यह मिथक पुरानी मान्यता पर आधारित है। कुट्टू भारतीय रसोई में सिर्फ व्रत का भोजन नहीं, बल्कि एक बहुमुखी सुपरफूड है, जिसे नाश्ते से लेकर रात के खाने तक शामिल किया जा सकता है।

कुट्टू का आटा (कुट्टू का आटा) पराठे, चीला, इडली, डोसा और यहाँ तक कि पास्ता और नूडल्स बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुट्टू के दानों को चावल की तरह पकाकर खिचड़ी या पुलाव बनाया जा सकता है।

🌱 भारत में कुट्टू की खेती मुख्य रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में होती है। यह भारतीय कृषि का एक अभिन्न अंग है, जो इसे स्थानीय और टिकाऊ विकल्प बनाता है।

भोजन के नैतिक दृष्टिकोण से, स्थानीय रूप से उगाए गए कुट्टू का चुनाव करके आप भारतीय किसानों का समर्थन करते हैं और कार्बन फुटप्रिंट कम करते हैं।


मिथक 3: क्विनोआ अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल है

सीधा उत्तर: यह गलत है। क्विनोआ की व्यावसायिक खेती का पर्यावरणीय प्रभाव कुट्टू की तुलना में कहीं अधिक है। क्विनोआ मुख्य रूप से बोलिविया, पेरू और संयुक्त राज्य अमेरिका में उगाया जाता है, और इसे भारत तक पहुँचाने में हजारों मील की दूरी तय करनी पड़ती है।

एक अध्ययन के अनुसार, क्विनोआ की खेती में प्रति किलोग्राम उत्पादन के लिए लगभग 1,200 लीटर पानी की आवश्यकता होती है (Mekonnen & Hoekstra, 2011)। इसके विपरीत, कुट्टू एक कठोर फसल है जो कम पानी और खराब मिट्टी में भी उग सकती है।

भारतीय परिप्रेक्ष्य में, जहाँ पानी की कमी एक गंभीर समस्या है, कुट्टू की खेती कहीं अधिक टिकाऊ है। यह फसल सिंचाई पर निर्भर नहीं है और मानसून की बारिश पर ही पनप सकती है, जिससे यह वर्षा-आधारित कृषि के लिए आदर्श है।


मिथक 4: क्विनोआ का स्वाद कुट्टू से बेहतर होता है, इसलिए यह अधिक पौष्टिक है

सीधा उत्तर: स्वाद और पोषण का आपस में कोई संबंध नहीं है। क्विनोआ में हल्का, पौष्टिक स्वाद होता है, जबकि कुट्टू का स्वाद मिट्टी जैसा और थोड़ा कड़वा होता है। लेकिन पोषण के मामले में दोनों लगभग बराबर हैं, और कुट्टू कुछ मामलों में बेहतर भी है।

कुट्टू में रुटिन नामक एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो रक्त परिसंचरण में सुधार और सूजन को कम करने में मदद करता है। कुट्टू में मैग्नीशियम, तांबा और फाइबर भी प्रचुर मात्रा में होते हैं।

पोषक तत्व (प्रति 100 ग्राम सूखा)क्विनोआकुट्टू
प्रोटीन (ग्राम)14.113.2
फाइबर (ग्राम)7.010.0
मैग्नीशियम (मिलीग्राम)197231
आयरन (मिलीग्राम)4.62.2
पानी की खपत (लीटर/किग्रा)~1,200~500

Bottom line: कुट्टू में अधिक फाइबर और मैग्नीशियम होता है, जो पाचन स्वास्थ्य और हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। स्वाद की व्यक्तिपरकता को पोषण से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।


मिथक 5: क्विनोआ सभी के लिए सुरक्षित है, कुट्टू कुछ लोगों में एलर्जी पैदा कर सकता है

सीधा उत्तर: यह आंशिक रूप से सच है, लेकिन क्विनोआ भी कुछ लोगों में समस्याएँ पैदा कर सकता है। क्विनोआ में सैपोनिन नामक यौगिक होता है, जो कड़वा स्वाद देता है और कुछ लोगों में पाचन संबंधी समस्याएँ पैदा कर सकता है। हालाँकि, अधिकांश व्यावसायिक रूप से बेचे जाने वाले क्विनोआ को धोकर इस परत को हटा दिया जाता है।

कुट्टू में एलर्जी हो सकती है, लेकिन यह दुर्लभ है। कुट्टू में फागोपाइरिन नामक यौगिक होता है, जो प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता पैदा कर सकता है, लेकिन केवल बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने पर।

भारतीय संदर्भ में, कुट्टू का सेवन सदियों से व्रत के दौरान बिना किसी समस्या के किया जाता रहा है। यह सुरक्षित और स्वस्थ विकल्प है, बशर्ते आप इसे संतुलित मात्रा में खाएँ।

⚠️ ध्यान दें: यदि आपको क्रॉस-रिएक्टिविटी की समस्या है, जैसे कि लेटेक्स या कुछ फलों से एलर्जी, तो कुट्टू का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें।


मिथक 6: क्विनोआ-आधारित उत्पाद भारतीय बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं और किफायती हैं

सीधा उत्तर: यह गलत है। क्विनोआ की कीमत भारतीय बाजार में प्रति किलोग्राम 300 से 600 रुपये के बीच होती है, जबकि कुट्टू की कीमत केवल 80 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम होती है (सितंबर 2026, विभिन्न ऑनलाइन रिटेलर)। यह अंतर भारतीय परिवारों के लिए बड़ा है।

क्विनोआ मुख्य रूप से आयातित होता है, और इसलिए इसकी कीमत वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव, मुद्रा विनिमय दर और लॉजिस्टिक्स लागत से प्रभावित होती है। इसके विपरीत, कुट्टू भारतीय किसानों द्वारा उगाया जाता है, जिससे यह किफायती और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।

📈 संख्याओं में: भारतीय कुट्टू की कीमत पिछले 5 वर्षों में केवल 10% बढ़ी है, जबकि क्विनोआ की कीमत में 25% की वृद्धि हुई है। नैतिक उपभोक्ता के लिए, कुट्टू न केवल बजट-अनुकूल है, बल्कि स्थानीय कृषि को भी समर्थन देता है।


मिथक 7: क्विनोआ प्रोटीन की गुणवत्ता कुट्टू से बेहतर है

सीधा उत्तर: दोनों की प्रोटीन गुणवत्ता लगभग समान है, और कुट्टू में कुछ मामलों में लाभ भी है। प्रोटीन की गुणवत्ता को मापने के लिए PDCAAS (प्रोटीन डाइजेस्टिबिलिटी करेक्टेड अमीनो एसिड स्कोर) का उपयोग किया जाता है। क्विनोआ का PDCAAS स्कोर 0.92 है, जबकि कुट्टू का 0.91 है (FAO, 2011)। यह अंतर नगण्य है।

कुट्टू में लाइसिन और आर्जिनिन जैसे अमीनो एसिड अधिक मात्रा में होते हैं, जो मांसपेशियों की मरम्मत और प्रतिरक्षा कार्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। एक शाकाहारी या शाकाहारी आहार में, जहाँ प्रोटीन की गुणवत्ता एक चिंता का विषय हो सकती है, कुट्टू उतना ही प्रभावी है जितना कि क्विनोआ।


नैतिक भोजन: भारतीय उपभोक्ता के लिए क्या सही है?

जैसा कि हमने देखा, कुट्टू और क्विनोआ दोनों ही पोषण के दृष्टिकोण से उत्कृष्ट हैं। लेकिन जब स्थिरता और नैतिकता की बात आती है, तो कुट्टू स्पष्ट विजेता है। यहाँ एक त्वरित जाँच सूची है, जो आपके निर्णय में मदद कर सकती है:

  • स्थानीयता: कुट्टू भारतीय किसानों द्वारा उगाया जाता है; क्या आप स्थानीय अर्थव्यवस्था का समर्थन करना चाहते हैं?
  • पानी की बचत: कुट्टू की खेती में आधा पानी लगता है;
  • बजट: कुट्टू क्विनोआ से आधी कीमत पर उपलब्ध है;
  • ग्लूटेन-मुक्त: दोनों ग्लूटेन-मुक्त हैं और सीलिएक रोगियों के लिए सुरक्षित हैं;
  • पोषण: दोनों पूर्ण प्रोटीन हैं, लेकिन कुट्टू में फाइबर अधिक है।

भारत में नैतिक भोजन का अर्थ केवल पशु उत्पादों से बचना नहीं है, बल्कि ऐसे खाद्य पदार्थों का चयन करना है जो पर्यावरण के लिए जिम्मेदार हों और स्थानीय समुदायों का समर्थन करें।


सितंबर 2026: बदलते खाद्य परिदृश्य में आपकी भूमिका

इस साल, भारत सरकार ने 'मिलेट्स रिवाइवल' योजना के तहत छद्म-अनाज को बढ़ावा देने के लिए नई पहल की घोषणा की है। कुट्टू इस योजना का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन, सूखा और अनियमित वर्षा के कारण, कुट्टू जैसी कठोर फसलें भविष्य की खाद्य सुरक्षा का आधार बन सकती हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR) के अनुसार, कुट्टू की जैविक खेती से उपज में 20% की वृद्धि हुई है, जो इसे और भी आकर्षक विकल्प बनाती है।

कारकक्विनोआकुट्टू
स्रोतआयातित (बोलिविया, पेरू)भारतीय (उत्तराखंड, हिमाचल)
कीमत (₹/किग्रा)300-60080-150
पानी की खपतअधिककम
प्रोटीन (सूखा)14.1 ग्राम13.2 ग्राम
फाइबर7 ग्राम10 ग्राम

निष्कर्ष: अपनी थाली को बनाएँ टिकाऊ और नैतिक

प्रोटीन के लिए आपको विदेशी सुपरफूड्स की ओर भागने की आवश्यकता नहीं है। कुट्टू, जो हमारी धरती पर सदियों से उगाया जा रहा है, प्रोटीन, फाइबर और स्थिरता के मामले में क्विनोआ के बराबर या उससे बेहतर है।

हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम ऐसे खाद्य पदार्थों का चयन करें जो हमारे शरीर, हमारे किसानों और हमारे ग्रह के लिए फायदेमंद हों। अगली बार जब आप स्वस्थ भोजन की खरीदारी करें, तो कुट्टू को एक मौका दें। यह आपके स्वास्थ्य, आपके बजट और पर्यावरण के लिए एक विजेता विकल्प है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कुट्टू में क्विनोआ से अधिक प्रोटीन होता है?

नहीं, क्विनोआ में थोड़ा अधिक प्रोटीन होता है, लेकिन अंतर बहुत कम है। 100 ग्राम सूखे क्विनोआ में 14.1 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि कुट्टू में 13.2 ग्राम। दोनों ही पूर्ण प्रोटीन हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें सभी 9 आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं। अधिकांश लोगों के लिए, यह अंतर आहार में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाता।

क्या कुट्टू वजन घटाने के लिए अच्छा है?

हाँ, कुट्टू वजन घटाने के लिए उत्कृष्ट है। इसमें प्रति 100 ग्राम में 10 ग्राम फाइबर होता है, जो लंबे समय तक तृप्ति की भावना प्रदान करता है और भूख को नियंत्रित करता है। कुट्टू में निम्न ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी होता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर रखता है और अचानक भूख लगने की संभावना को कम करता है।

क्या मधुमेह रोगी क्विनोआ और कुट्टू का सेवन कर सकते हैं?

हाँ, दोनों मधुमेह रोगियों के लिए सुरक्षित हैं। कुट्टू में विशेष रूप से रुटिन और अन्य फ्लेवोनोइड्स होते हैं जो इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार कर सकते हैं। हालाँकि, भाग नियंत्रण महत्वपूर्ण है। मधुमेह रोगियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने आहार में किसी भी बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

क्या क्विनोआ और कुट्टू दोनों ग्लूटेन-मुक्त हैं?

हाँ, दोनों छद्म-अनाज हैं और प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त हैं। ये सीलिएक रोग या ग्लूटेन संवेदनशीलता वाले लोगों के लिए सुरक्षित विकल्प हैं। हालाँकि, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आप क्रॉस-संदूषण से बचने के लिए प्रमाणित ग्लूटेन-मुक्त उत्पाद खरीदें।

भारत में कुट्टू कहाँ उगाया जाता है?

भारत में कुट्टू मुख्य रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में उगाया जाता है। यह एक कठोर फसल है जो 2,000 से 4,000 मीटर की ऊँचाई पर पनपती है। इसकी खेती में रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह जैविक खेती के लिए आदर्श है।

क्या कुट्टू खाने से कोई दुष्प्रभाव हो सकते हैं?

कुट्टू आमतौर पर सुरक्षित है, लेकिन कुछ लोगों में दुर्लभ एलर्जी हो सकती है। कुट्टू में फागोपाइरिन होता है, जो अधिक मात्रा में सेवन करने पर प्रकाश के प्रति त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ा सकता है। यदि आपको कुट्टू से एलर्जी का कोई लक्षण दिखे, जैसे त्वचा पर चकत्ते या सूजन, तो इसका सेवन बंद करें और डॉक्टर से परामर्श करें।

कौन सा अधिक टिकाऊ है, क्विनोआ या कुट्टू?

कुट्टू कहीं अधिक टिकाऊ है। भारत में इसकी खेती वर्षा आधारित है और इसे कम पानी की आवश्यकता होती है। क्विनोआ को दक्षिण अमेरिका से आयात किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है और स्थानीय किसानों को लाभ नहीं होता। कुट्टू का चुनाव करके आप भारतीय कृषि को समर्थन देते हैं और अपने पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कुट्टू में क्विनोआ से अधिक प्रोटीन होता है?
नहीं, क्विनोआ में थोड़ा अधिक प्रोटीन होता है, लेकिन अंतर बहुत कम है। 100 ग्राम सूखे क्विनोआ में 14.1 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि कुट्टू में 13.2 ग्राम। दोनों ही पूर्ण प्रोटीन हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें सभी 9 आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं। अधिकांश लोगों के लिए, यह अंतर आहार में कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाता।
क्या कुट्टू वजन घटाने के लिए अच्छा है?
हाँ, कुट्टू वजन घटाने के लिए उत्कृष्ट है। इसमें प्रति 100 ग्राम में 10 ग्राम फाइबर होता है, जो लंबे समय तक तृप्ति की भावना प्रदान करता है और भूख को नियंत्रित करता है। कुट्टू में निम्न ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी होता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर रखता है और अचानक भूख लगने की संभावना को कम करता है।
क्या मधुमेह रोगी क्विनोआ और कुट्टू का सेवन कर सकते हैं?
हाँ, दोनों मधुमेह रोगियों के लिए सुरक्षित हैं। कुट्टू में विशेष रूप से रुटिन और अन्य फ्लेवोनोइड्स होते हैं जो इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार कर सकते हैं। हालाँकि, भाग नियंत्रण महत्वपूर्ण है। मधुमेह रोगियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने आहार में किसी भी बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
क्या क्विनोआ और कुट्टू दोनों ग्लूटेन-मुक्त हैं?
हाँ, दोनों छद्म-अनाज हैं और प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त हैं। ये सीलिएक रोग या ग्लूटेन संवेदनशीलता वाले लोगों के लिए सुरक्षित विकल्प हैं। हालाँकि, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि आप क्रॉस-संदूषण से बचने के लिए प्रमाणित ग्लूटेन-मुक्त उत्पाद खरीदें।
भारत में कुट्टू कहाँ उगाया जाता है?
भारत में कुट्टू मुख्य रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में उगाया जाता है। यह एक कठोर फसल है जो 2,000 से 4,000 मीटर की ऊँचाई पर पनपती है। इसकी खेती में रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह जैविक खेती के लिए आदर्श है।
क्या कुट्टू खाने से कोई दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
कुट्टू आमतौर पर सुरक्षित है, लेकिन कुछ लोगों में दुर्लभ एलर्जी हो सकती है। कुट्टू में फागोपाइरिन होता है, जो अधिक मात्रा में सेवन करने पर प्रकाश के प्रति त्वचा की संवेदनशीलता बढ़ा सकता है। यदि आपको कुट्टू से एलर्जी का कोई लक्षण दिखे, जैसे त्वचा पर चकत्ते या सूजन, तो इसका सेवन बंद करें और डॉक्टर से परामर्श करें।
कौन सा अधिक टिकाऊ है, क्विनोआ या कुट्टू?
कुट्टू कहीं अधिक टिकाऊ है। भारत में इसकी खेती वर्षा आधारित है और इसे कम पानी की आवश्यकता होती है। क्विनोआ को दक्षिण अमेरिका से आयात किया जाता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है और स्थानीय किसानों को लाभ नहीं होता। कुट्टू का चुनाव करके आप भारतीय कृषि को समर्थन देते हैं और अपने पर्यावरणीय पदचिह्न को कम करते हैं।

स्रोत

  1. USDA FoodData Central: Quinoa
  2. USDA FoodData Central: Buckwheat
  3. FAO: Dietary protein quality evaluation
  4. Mekonnen & Hoekstra - The water footprint of humanity
  5. ICAR - Indian Institute of Millet Research
  6. National Institute of Nutrition, India

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